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बदलते
परिवेश में जिस्मफरोशी का अवैध कारोबार भी अब पूरी तरह से हाई टेक हो चला
है | शहरों के रेड लाईट क्षेत्रों में बने कोठों से निकलकर, आधुनिकता की
चादर ओढे इस अवैध कारोबार ने मसाज पार्लर और ब्यूटी पार्लरों को अपना
ठिकाना बना लिया है | और तो और मसाज पार्लर और ब्यूटी पार्लर ही नहीं
कंसल्टेंसी आफिसों, एक्सपोर्ट हाउसों, कोचिंग एवं ट्यूशन सेंटरों, कॉल
सेंटरों, होटलों तथा साबर केफे के केबिनों तक यह अवैध कारोबार पहुँच चुका
है | शासन प्रशासन कई प्रयासों के बावजूद, जिस्मफरोशी के इस अवैध धंधे पर
अंकुश लगा पाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है | स्थानीय नामी गिरामी
हस्तियों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण, पुलिस की लगातार छापामार
कार्यवाही की बाद भी इस काले कारोबार की जड़ें दिन ब दिन मज़बूत होती जा
रहीं हैं |
देश के महानगरों से शुरू हुआ ये कारोबार पूर्णतः हाईटेक हो गया है, और आज
देश के कई छोटे-बडे और तेज़ी से बकसित हो रहे शहरों में अपनी जड़ें जमा चुका
है | जहां दिल्ली, मुंबई, बेंगलोर और हैदराबाद से कॉल गर्ल्स को ठेके पर
बुलवाया जाता है और ग्राहकों के सामने मुह माँगी कीमत पर परोस दिया जाता
है | एक रिकार्ड के अनुसार देश के ३२ शहरों में जिस्मफरोशी का धंधा करने
वाली हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल्स दिल्ली, मुंबई और बेंगलोर में अपना ठिकाना
बनाये हुए हैं | वहीं अब इन हाई प्रोफाइल काल गर्ल्स का दायरा छोटे शहरों
भोपाल, इंदौर, देहरादून जैसे अन्य शहरों में फैलने लगा है |
देह व्यापार में लिप्त सरगनाओं का नेटवर्क इतना तगडा है कि प्रशासन इसे
तोड़ पाने में पूरे तरह से नाकाम रहा है | पूरी तरह से नाकाम हो चुके इस
कारोबार में लिप्त सरगनाओं और एजेंसियों ने ग्राहकों तक अपनी पहुंच बनाने
और ग्राहकों के सुविधा के लिए सूचना और संचार क्रान्ति को अपना प्रमुख
माध्यम बना लिया है | इस काले धंधे में लिप्त एजेंसियों द्वारा इंटरनेट
पर वेबसाईट के माध्यम से इस कारोबार की जानकारी बेहद खुले तौर पर उपलब्ध
कराई जा रहीं हैं | साथ ही इन वेबसाइटों पर इस घिनौने धंधे में लिप्त
दलालों और सरगनाओं के मोबाइल नंबर (कांटेक्ट डीटेल्स) आसानी से मिल जाते
हैं ताकि ग्राहकों को संपर्क करने में किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो |
इन वेबसाइटों पर हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल्स की रेट लिस्ट भी उपलब्ध रहती
हैं | साथ ही इस दलदल में रोज़गार यानी ( कॉल गर्ल्स / जिगोलो ) के लिए
भी खुले तौर पर आमंत्रण लिए जा रहे हैं |
शासन प्रशासन की पूरी मुस्तैदी और इस अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार हो रही
कार्यवाहियों के बाद भी देह व्यापार का यह अवैध धंधा अपनी जड़े जमा चुका
है | आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इन वेबसाइटों का संचालन कर रहे केंद्र /
एजेंसियां खुद को वैध बताते हैं और मसाज / ब्यूटी ट्रीटमेंट, हैल्थ
ट्रीटमेंट के नाम पर ग्राहकों को फंसा लिया जाता है तथा उन्हें जिस्मानी
सुख देकर मोटी रकम वसूल ली जाती है | हालात तो ये हैं कि इस कारोबार में
लिप्त दलाओं ने अपनी निजी वेबसाईट बना रखी है और ये दलाल अलग अलग शहरों
के मसाज / ब्यूटी पार्लरों के संपर्क में भी रहते हैं | बेहद खुले तौर पर
फल फूल रहे इस कारोबार पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है और न ही साइबर
क्राइम एक्सपर्ट या पुलिस के विशेषज्ञ अधिकारी इस और कोई ध्यान दे रहे
हैं |
वेबसाईट:- डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.क्यूटमुंबई.कॉम,
डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.देहलिफीमेल.कॉम,
डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.इंडीपेनडेंटगर्ल्स.कॉम,
डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.इंडियनब्लूएस्कोर्ट्स.ओआरजी,
डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.पंजाबीसिमरन.कॉम,
डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.वाइससिस्टर्स.कॉम, अनेकों वेबसाईट हैं जिन पर खुले
रूप में इस घिनौने धंधे की जानकारियाँ उपलब्ध कराई जा रहीं हैं |
गौर करने वाली मुख्या बात तो यह है कि देह व्यापार के इस घिनौने खेल में
छोटे तबके के मजबूर ही नहीं बल्कि ऊंचे, सभ्य और सुसंस्कृत परिवारों की
आधुनिक लडकियां भे बढ़ चड़कर हिस्सा ले रहीं हैं | इनमें अंगरेजी माध्यम
से शिक्षित और संपन्न घरों की लडकियां भी शामिल हैं | जो अपने ग्रहनगरों
से दूर अन्य दूसरे शहरों में उच्च शिक्षा अर्जित करने / नौकरी करने के
लिए जाती हैं | बढे हुए रिहायशी खर्च, ऊंचे स्टेटस का खोखला दिखावा और
ऐशोआराम का जीवन जीने की चाहतें पूरी करने के लिए ये लडकियां इस गंदे
कारोबार को अपना रहीं हैं | दूसरी और ज्यादा धन कमाने की लालसा, नशे की
बुरी लत, बढ़ती बेरोजगारी, घरेलू हिंसा, पारिवारिक या फिर कोई मानसिक
उत्पीडन जैसे ठोस कारणों के कारण अज एक आत्म्बल्हीन पीढी तैयार हो गई है
| जो संयम और नैतिकतावादी विचारधाराओं से दूर होती जा रही है |
परिणामस्वरूप ये पीढी महज़ दौलत और शोहरत ही नहीं शारीरिक सुख पाने के
लिए किसी भी हद तक चली जाती है | और तो और उच्चवर्गीय पारिवारिक माहौल,
कॉन्वेंट शिक्षित, पैसों की कोई कमी न होने के बावजूद महज़ शौक और मजे के
लिए लडकियां इस कारोबार को बेझिझक अपना रहीं हैं | मध्यमवर्गीय और घरेलू
महिलायें इस धंधे को बखूबी सिंचित कर रहीं हैं | फलस्वरूप कुकुरमुत्तों
की तरह ब्यूटी/मसाज पार्लरों की बाढ़ आ गई है | बड़ी-बड़ी माडल और वालीवुड
की तृतीय श्रेणी की अभिनेत्रियों समेत एयर होस्टेज तक इस दलदल में फंसी
हुई हैं |
अगर ग्राहकों की बात करें तो आम आदमियों को छोड़कर वरिष्ठ प्रशासनिक
अधिकारी, नेता, मंत्री और बडे-बडे नामी गिरामी बिसनिसमेन सभी शामिल हैं |
समय-समय पर हुई पुलिस की छपामार कार्यवाही से इस बात का खुलासा भी कई बार
हो चुका है |
लचर कानून :- बदलते आधुनिक परिवेश में बेशर्मी और बेहूदगी का ये घिनौना
खेल जितना हाईटेक और विस्तृत हो चला है | उसे रोकने के लिए बना कानून आज
उतना ही बौना साबित हो रहा है | आई.टी.पी.टी. एक्ट ( इम्मोरल ट्रेफिकिंग
प्रिवेंशन एक्ट ) १९५६ की धाराएं गैर जमानतीय बनाई गईं हैं | इस एक्ट के
तहत तय सजा तीन वर्ष से अधिक की नहीं है | अर्थात देह व्यापार के अपराध
में सज़ा का प्रावधान अवैध रूप से हथियार रखने संबन्धी अधिनियम २५/४
आई.पी.सी. के तहत चाकू रखने की सज़ा से भी कम है | यही कारण है कि
जिस्मफरोशी के इस घिनौने धंधे में लिप्त दलाल और कॉल गर्ल्स जल्दी से रिहा
हो जाते हैं और उसके बाद पुनः इस धंधे से जुड़ जाते हैं |
आपराधिक मामलों की जानकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे
मामलों में कड़ी सज़ा का प्रावधान होना चाहिए | ताकि लोगों में कानून के
प्रति दहशत हो और वे इस घिनौने कारोबार को न अपनाएँ |
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक :-- छापामार कार्यवाही के बाद पकडी गई कॉल
गर्ल्स में से अधिकतर की केस हिस्ट्री में पाया गया कि अपने से जुड़े
पारिवारिक लोगों या फिर दोस्तों से किसी शारीरिक या फिर मानसिक उत्पीडन
का शिकार होतीं हैं | और किसे बदले की भावना से ग्रसित होने के कारण इस
काम को करने में उन्हें कोई अपराधबोध या शर्म महसूस नहीं होती | कुछ
मनोचिकित्सकों का कहना था कि नै पीढी के बदलते मूल्य बोध के पीछे आर्थिक
स्वतन्त्रता तो है ही भरोसेमंद गर्भनिरोधकों ने भी लड़कियों को यौन
स्वतन्त्रता का एहसास कराया है परिणामस्वरूप ये अपनी शारिक इच्छाएं ज़्यादा
खुले तौर पर पूरे कर रहीं हैं | कुछ मनोचिकित्सकों की राय में कुछ लडकियां
मजे और पैसे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती हैं साथ ही वर्तमान
में ऐसी लड़कियों की संख्या में इजाफा हुआ है |
बहरहाल चौतरफा पैर पसार चुके इस घ्रणित कारोबार को जड़ से उखाड़ पाना इतना
आसान नहीं होगा | भारतीय संस्कृति और समाज में दबे पाँव सेंध लगा रहे इस
घिनौना कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने की ज़रुरत है | इस विषय में शासन
और प्रशासन ही नहीं बल्कि सभी को गौर देने की ज़रुरत है | परिजनों को अपनी
बच्चों की स्वतन्त्रता और कामयाबी का हनन किये बगैर तथा संयम और नैतिकता
का मूल्य बोध कराकर इस दलदल में फंसने से रोका जा सकता है | |