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उत्तराखंड: कुशल प्रशासक और चतुर राजनेता की छाप छोड़ी निशंक ने
 

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चों पर कसरते तेज कर चुके हैं। राजनीतिक मोर्चों पर निशंक ने विधायकों और संगठन के महत्वपूर्ण नेताओं को झण्डियां बांटकर अपनी पकड़ मजबूत की है। अफसरशाही पर पकड़ बनाने के लिए प्रशासनिक मोर्चों पर पार्टी हित में कोशिशें तेज की हैं। आर्थिक मोर्चों पर कसरत करते हुए निशंक ने केन्द्र से प्रदेश हितों की आवाज बुलंद कर आर्थिक व उदार सहायता की समय समय पर मांगे उठाई हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने सवा सौ दिन के शासन काल में एक कुशल प्रशासक, चतुर राजनेता और एक अच्छे लोकप्रिय नेता की छाप छोड़ी है। जिससे उनका राज्य की जनता के साथ-साथ पार्टी हाई कमान पर भी भरोसा बना है। प्रदेश में भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए निशंक ने कोशिशें तेज करते हुए जनहित में भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण प्रदान करने की अपने सवा सौ दिन के शासन काल में निशंक की सबसे बड़ी उपलब्धि विकास नगर विधानसभा उप चुनाव को जीतना रही। इसके अलावा प्रशासनिक क्षेत्र में उन्होंने सालाना योजना के लिए ८०० करोड़ रूपए ज्यादा धन केन्द्र सरकार से राज्य को दिलवा कर राज्य के विकास के रास्ते खोलें हैं। साथ सालाना योजना का आकार बढ़ाया है।
उन्होंने भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की है और ईमानदार अफसरों की पीठ थपथपाई है। पार्टी के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कायम कर पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है। भुवनचंद्र खंडूड़ी के समय में पार्टी कार्यकर्ताओं व सरकार के बीच जो संवादहीनता की स्थिति आ गई थी उसे निशंक ने तोड़ कर कार्यकर्ताओं व आम जनता से सीधा रिश्ता कायम किया है। दो ढाई साल से जंग पड़ी नौकरशाही को निशंक ने सवा सौ दिन में खंगाल कर ठीक किया और एक नई कार्य संस्कृति को विकसित किया है। मुख्यमंत्री सचिवालय का औचक निरीक्षण कर देर से आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार चेतावनी दी। नौ विधायकों को संसदीय सचिव और पार्टी के २५ वरिष्ठ नेताओं को लाल बत्ती देकर निशंक ने सरकार और संगठन दोनों में अपना दबदबा बनया। हरिद्वार कुंभ मेले के सुस्त गति से चल रहें कामों का आकस्मिक निरीक्षण कर करीब आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की। इस कार्यवाही के बाद कुंभ कार्यों में तेजी आई। और कुंभमेला प्रशासन पर मुख्यमंत्री का खौफ कायम हुआ।
निशंक ने अपने कार्यकाल के पहले ही महीने में सत्तर हजार से ज्यादा लोगों से सीधा संवाद कायम कर जनसमस्याओं का काफी हद तक निपटारा किया, जो एक रेकार्ड है। कुशल राजनेता का परिचय देते हुए निशंक ने पूर्व मुख्यमंत्रियों नित्यानंद स्वामी, भुवनचंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी से सीधे संवाद काम किया और तालमेल बनाए रखा। अपने विरोधी दलों कांग्रेस, सपा और वामपंथी दलों के नेता जो जनहित से जुड़े काम निशंक के पास लेकर आए उन्हें उन्होंने तुरंत निपटा कर उन्हें अपना कायल बना लिया। निशंक को पार्टी स्तर पर बिशन सिंह चुफाल जैसा दोस्ताना प्रदेश अध्यक्ष मिलने से सबसे ज्यादा सहुलियत हुई है।
निशंक ने कालाढूंगी व हरिद्वार पुलिस-भाजपाईयों की भिडंत और सिंचाई मंत्री मातबर सिंह कंडारी, सिंचाई सचिव फोनिया और ओएसडी असगर अली विवादों को भी बड़े संयम व कठोरता का परिचय देते हुए निपटाया। निशंक राजनीतिक मोर्चे पर तीन तरफा कामयाब रहे। एक, सौ दिनों में उन्होंने पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व का भरोसा भी जीता और संघ का दिल जीता। वे विकासनगर विधानसभा सीट जितवा कर पार्टी हाईकमान व संघ के चहेते बन गए और प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्री को अपनी वाकपटुता से प्रभावित कर राज्य को आर्थिक मोर्चे पर फायदा पहुंचाने में कामयाब रहे।