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प्राकृतिक न्याय के लिए कोर्ट जा सकते हैं नागरिक

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन पर अन्य वैकल्पिक समाधान होने के बावजूद नागरिकों को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में जाने का पूरा अधिकार है। उदाहरण के लिए संवैधानिक व्यवस्था कहती है कि यदि किसी व्यक्ति को यह महसूस होता है कि संबंधित अधिकारियों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है, तो वह राहत के लिए मनोनीत अभिकरण, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। न्यायाधीश तरुण चटर्जी व न्यायाधीश आफताब आलम की पीठ ने मरियम्मा... विस्तृत...


अंग्रेजी बोलकर चूना लगाते हैं ये भिखारी

फटे पुराने चिथड़े पहने बेशक वह आपको भद्दे लगें, लेकिन जैसे ही वह आपके पास आकर शानदार अंग्रेजी लहजे में बात करते हैं, तो यकीनन आप उन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं। आजकल भिखारियों का यही नया रूप देखने को मिल रहा है। कनॉट प्लेस के पास इन दिनों ऐसे भिखारी आसानी से देखे जा सकते हैं जो अंग्रेजी बोलकर भीख मांग रहे हैं। लेकिन यह सीधे तौर पर रुपए नहीं मांगते और न ही खाना मांगते हैं बल्कि इन्होंने एक नया तरीका अपना लिया है। यह कहते हैं कि इन्हें दवाई...  विस्तृत...


हाई टेक हुआ जिस्मफरोशी का अवैध कारोबार - लचर कानून |

बदलते परिवेश में जिस्मफरोशी का अवैध कारोबार भी अब पूरी तरह से हाई टेक हो चला है | शहरों के रेड लाईट क्षेत्रों में बने कोठों से निकलकर, आधुनिकता की चादर ओढे इस अवैध कारोबार ने मसाज पार्लर और ब्यूटी पार्लरों को अपना ठिकाना बना लिया है | और तो और मसाज पार्लर और ब्यूटी पार्लर ही नहीं कंसल्टेंसी आफिसों, एक्सपोर्ट हाउसों, कोचिंग एवं ट्यूशन सेंटरों, कॉल सेंटरों, होटलों तथा साबर केफे के केबिनों तक यह अवैध कारोबार पहुँच चुका है | शासन प्रशासन कई प्रयासों के बावजूद, जिस्मफरोशी के इस अवैध धंधे पर अंकुश लगा पाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है |  विस्तृत...