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नई दिल्लीः ग्लोबल मंदी की आहट अब देश के रीयल एस्टेट सेक्टर में साफ
दिखाई देने लगी है। देश की सबसे बड़ी रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने
स्वीकार किया है कि डिमांड में कमी आने से उसका कारोबार प्रभावित हुआ है।
इस कारण उसने अपने कुछ कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। उसने अपनी
विस्तार योजनाओं को भी फिलहाल टाल दिया है। कई होटल और हाउसिंग
प्रॉजेक्ट्स का काम रोक दिया गया है।
भारतीय आर्थिक सम्मेलन में शिरकत करने आए डीएलएफ के प्रमुख के. पी. सिंह
ने कहा कि उन्होंने कुछ जगहों पर कर्मचारियों की छंटनी की है। हालांकि
उन्होंने इसका ब्यौरा देने से मना कर दिया कि किस स्तर के कर्मचारी या
अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
उन्होंने कहा कि रीयल एस्टेट में मांग में सुस्ती आ गई है। बाजार में मनी
फ्लो थम सा गया है। जब डिमांड कम होगी और प्रॉजेक्ट नहीं बिकेंगे तो नए
प्रॉजेक्ट्स के लिए धन कहां से आएगा। यही कारण है कि उन्होंने अपने कुछ
होटल, रेज़िडेंशल और कमर्शल प्रॉजेक्ट्स को कुछ समय के लिए टाल दिया है।
ब्याज दरों में कमी का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि ब्याज दरें 7 फीसदी
पर वापस आनी चाहिए, तभी कुछ बात बनेगी। वरना रीअल एस्टेट के कारोबार में
सुस्ती जारी रहेगी। कोई खरीदार नहीं होगा और नई प्रॉजेक्ट्स को बंद करने
के लिए डिवेलपरों को मजबूर होना पड़ेगा।
गौरतलब है कि पार्श्वनाथ डिवेलपर्स के प्रमुख प्रदीप जैन ने इस बात को
पूरी तरह से नकार दिया था कि रीयल एस्टेट में डिमांड की कोई कमी है।
उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा था कि रीयल एस्टेट में कीमतें कम नहीं
होंगी। मूल्य के फ्रंट पर टेक्नीकल करेक्शन की उम्मीद करना भी तर्कसंगत
नहीं होगा।
के.पी. सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब डिमांड कम होगी तो उसका
असर कीमतों पर आना लाजमी है यानी कीमतों में नरमी का रुख भी आएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को नकदी बढ़ाने और ब्याज दरों में कटौती के बारे
में जल्द फैसला करना चाहिए, वरना सभी सेक्टरों पर ग्लोबल मंदी का असर और
गहरा सकता है। रीयल एस्टेट अब देश की जीडीपी का एक अहम हिस्सा बन गया है।
अगर इस सेक्टर में मंदी आई तो जीडीपी की विकास दर भी प्रभावित होगी।
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