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बांग्लादेश
की प्रधानमंत्री शेख हसीना की यह भारत-यात्रI एतिहासिक सिद्घ होगी, इसमें
ज़रा भी शक नहीं है| यह भारत-बांग्ला स्वर्ण-युग का प्रारंभ है|
बांग्लादेश का जन्म 1971 में हुआ लेकिन पिछले 39 सालों में से 30 से भी
ज्यादा साल तक ढाका में ऐसी सरकारें बनीं, जिनका एक ही मूल-मंत्र् रहा,
भारत-विरोध| भारत-विरोध के नाम पर या तो वे चुनाव जीतती थीं या फौजी
तख्ता-पलट के बाद वे भारत-विरोध के दम पर अपना औचित्य सिद्घ करती थीं| उन
सरकारों ने भारत के साथ सहज संबंध बनाने की बजाय ऐसे कदम उठाए, जिससे
भारत का नुकसान हुआ, भारत की छवि बिगड़ी, भारत के दुश्मनों को मदद मिली
और बांग्लादेश को कोई फायदा नहीं हुआ| कुछ बांग्लादेशी सरकारों ने ऐसे
राष्ट्रों के साथ भी अपनी सांठ-गांठ बढ़ा ली, जो भारत को तबाह करने पर
तुले हुए थे|
शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीब तो भारत के अभिन्न मित्र् रहे हैं
लेकिन शेख हसीना के पिछले शासन-काल के दौरान भी अनेक अड़चनें बनी रहीं|
फरक्का जल-विवाद जरूर सुलझा लेकिन हसीना सरकार तब इतनी मजबूत नहीं थी कि
वह कोई जबर्दस्त कदम उठा पाती और इधर भारत में उस समय कई अल्पकालिक सरकारें
बनीं, जिनका ध्यान आंतरिक उठा-पटक पर अधिक केंदि्रत रहा| इस बार शेख हसीना
प्रचंड एवं अपूर्व बहुमत से जीती हैं और यह संयोग है कि समस्त भारत-विरोधी
ताकतों की पोल खुल चुकी है| भारत-विरोधी ताकतें आजकल इतनी पस्त हैं कि
शेख हसीना की इस भारत-यात्रI का उन्हें स्वागत करना पड़ा है| शेख-हसीना
की इस यात्रI के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच जो समझौते हुए हैं, वे
सिर्फ इन दो देशों ही नहीं बल्कि नेपाल, भूटान और म्यांमार पर भी गहरा
असर डालेंगे|
भारत ने बांग्लादेश को एक बिलियन डॉलर याने लगभग 4500 करोड़ रू. का
अनुदान दिया है| किसी भी विकासमान राष्ट्र के लिए यह बहुत बड़ी राशि है|
इतनी बड़ी राशि भारत ने अब से पहले किसी भी राष्ट्र को एकमुश्त नहीं दी
है| भारत ने अफगानिस्तान को लगभग सवा बिलियन डॉलर दिए हैं लेकिन वे उसे
पिछले 7-8 वर्षों में मिले हैं| इस घोषणा से दो बातें सिद्घ होती हैं| एक
तो यह पता चलता है कि भारत स्वयं समर्थ राष्ट्र है और दूसरा यह कि वह अपने
पड़ौसी राष्ट्रों के प्रति उदार है| भारत की इस घोषणा का सीधा लाभ शेख
हसीना को मिलेगा| बांग्लादेश में कहा जाएगा कि शेख हसीना की जगह यदि बेगम
खालिदा या जि़या या इरशाद होते तो क्या भारत इतनी बड़ी राशि दे देता ? अब
हसीना के विरोधियों की बोलती बंद हो जाएगी| भारत की इस उदारता का असर
अन्य पड़ौसी राष्ट्रों पर भी पड़ेगा|
भारत की इस उदारता का मार्ग हसीना ने पहले ही प्रशस्त कर दिया था| असम के
आतंकवादी नेता राजखोवा को भारत के हवाले करके ढाका सरकार ने यह स्पष्ट
संकेत दे दिया था कि अपनी ज़मीन पर वह कोई भी भारत-विरोधी गतिविधि
बर्दाश्त नहीं करेगी| सच्चाई तो यह है कि ढाका की पिछली कुछ सरकारों ने न
केवल भारत-विरोधी आतंकवादियों को प्रश्रय दिया बल्कि उन्हें पाकिस्तान के
शीर्ष नेताओं से भी मिलवाया था| अब जो तीन सुरक्षा समझौते हुए हैं, उनके
तहत दोनों देश आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता करेंगे,
सजायाफ्ता लोगों को लौटाएंगे, आतंकवादियों, गिरोहों और तस्करों के
विरूद्घ संयुक्त कार्रवाई करेंगे| इन समझौतों के कारण भारत को समस्त
पूर्वांचल में शांति स्थापित करने में सुविधा होगी| उन समाज-विरोधी तत्वों
को भी वह अपनी गिरफ्त में ले सकेगी, जो बांग्लादेश में छुपकर पाकिस्तानी,
श्रीलंकाई और बर्मी आतंकवादियों से सांठ-गांठ करते रहते हैं|
भारत ने बांग्लादेश को नेपाल और भूटान तक आने-जाने के लिए रेल और सड़क की
सुविधा देने की भी घोषणा की है| बांग्लादेश ने अखौरा-अगरतला रेल-लिंक
बनाने पर सहमति दी है| यह शुरूआत है और बहुत अच्छी है| यदि भारत और
बांग्लादेश अपनी-अपनी सीमा में से दोनों के माल और लोगों के लिए रास्ता
खोल दे तो यह संपूर्ण पूर्वांचल के लिए युगांतरकारी कदम होगा| यदि कलकत्ता
और अगरतला के बीच बांग्लादेश होकर रेल और सड़के दौड़ने लगें तो 1700 कि.मी.
का फासला सिर्फ 500 कि.मी. रह जाएगा| बांग्लादेशी रास्तों के खुल जाने से
भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार का आपसी व्यापार कई गुना बढ़
जाएगा| बांग्लादेश के फायदों को देखकर कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन
पाकिस्तान भी अपने थल-मार्ग भारत के लिए खोल देगा| उस दिन संपूर्ण मध्य
एशिया और दक्षिण एशिया के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक सहकार के नए युग का
सूत्र्पात होगा| पड़ौसी देशों का भय और संशय दूर करने के लिए भारत को
एकतरफा उदारता भी दिखानी पड़े तो दिखानी चाहिए|
यह उदारता मनमोहनसिंह सरकार प्रचुर मात्रI में दिखा रही है| बांग्लादेश
के साथ भारत का व्यापार बढ़े और भारत में बांग्ला माल ज्यादा खपे, इस
दृष्टि से कई रियायतें दी जा रही हैं| अभी बांग्लादेश भारत से लगभग 2500
मिलियन डॉलर का आयात करता है लेकिन भारत को उसका निर्यात 500 मिलियन डॉलर
भी नहीं है| भारत ने बांग्ला वस्तुओं पर तटकर घटाया है और 700 वस्तुओं की
निषेध सूची को घटाकर 400 वस्तुओं की कर दिया है| यदि पड़ौसी देशों के माल
को कर-मुक्त कर दिया जाए तो आखिर भारत का कितना नुकसान हो जाएगा ? भारत
थोड़ी पहल करे तो अगले पांच वर्षों में ही दक्षिण एशिया में मुक्त-बाजार
की स्थापना हो सकती है|
भारत ने बांग्लादेश को 250 मेगावाट बिजली देने का वायदा भी किया है| दोनों
देशों का जल-आयोग भी अब अधिक सकि्रय किया जाएगा ताकि बांग्लादेश को बाढ़
से बचाया जा सके और दोनों देशों के जल-स्त्रेतों का बहुविध उपयोग किया जा
सके| इसके अलावा बांग्लादेश के आशुगंज और भारत के सिलीघाट बंदरगाहों को
भी एक-दूसरे के लिए खोला जाएगा| अब चिटगांव और मंगला के बारे में भी थोड़ी
उदारता बरती जाएगी| 300 बांग्ला युवकों को भारत छात्र्वृत्ति देगा और अगले
साल दोनों देश मिलकर रवींद्र-डेढ़ शतक भी मनाएंगे| पिछले 39 साल में कुल
मिलाकर जितनी गहरी समझ दोनों देशों में पैदा नहीं हुई, उससे कहीं ज्यादा
इस यात्र के दौरान दिखाई पड़ रही है| सोनिया गांधी और प्रतिभा पाटील के
साथ छपे हसीना के आत्मीय चित्र् अपनी कहानी खुद कहते हैं| इसमें संदेह नहीं
कि 'भारत-पलट हसीना', अब दूसरी हसीना होंगी| बांग्लादेश में अब उनका जलवा
कुछ और ही होगा| भारत से जुड़ा उनका तार अब उन्हें अधिक विद्युतमय बना
देगा| उनकी यह यात्र उन्हें शेख मुजीब के सपनों का बांग्लादेश बनाने में
काफी मदद करेगी| प्रधानमंत्री के तौर पर शेख हसीना कई अन्य देशों का सफर
करेंगी लेकिन क्या इस सफर से ज्यादा हसीन कोई अन्य सफर होगा ?
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
(लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष और विदेश नीति विशेषज्ञ
हैं )
dr.vaidik@gmail.com |