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लाउड स्पीकर का प्रयोग कितना उपयोगी कितना घातक

नि:सन्देह विज्ञान ने अब तक जितने भी आविष्कार किये हैं उन्हें जहां अनेकों क्षेत्रों में 'वरदान' स्वरूप देखा जाता है वहीं इसके नकारात्मक परिणामों का विश्लेषण करने के बाद विशरूेषक इन्हीं वैज्ञानिक उपलब्धियों को 'अभिशाप' की संज्ञा देने से भी नहीं चूकते। इसी बात को इस पहलू से भी देखा जा सकता है कि जिस मनुष्य ने अपनी किसी वैज्ञानिक खोज द्वारा कुछ ऐसा कर दिखाया जिससे कि मानवता को लाभ हुआ तो इसे एक वरदान के रूप में देखा गया और जब मनुष्य द्वारा की गई इसी खोज ...  विस्तृत...


बदलते मौसम की आफत 'एलर्जी'

एक सुबह जब वंदना अचानक उठी, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था। कुछ ही मिनटों बाद उसके चेहरे और गर्दन पर लाल चकत्ते या रैशिज पत्रड गये। क्या यह ऐसी महामारी थी जिसकी बाइबिल में भविष्यवाणी की गयी है? यह सोचते हुए वह फौरन डॉक्टर के पास पहुंची। खतरे की घंटी उसके चारों तरफ बज रही थी। यह सब नाटक क्यों हो रहा था? डॉक्टर ने उसे बताया कि यह एलर्जिक रिएक्शन है जो बदलते मौसम की वजह से हुआ है। उपचार के लिए डॉक्टर ने वंदना को कुछ गोलियां दे दी। एलर्जिक रिएक्शन। सुनने में यह एक साधारण सी बात लगती है,...   विस्तृत...


आधुनिकता की देन है 'किडनी फेल्योर'?

ईश्वर ने मानव शरीर बत्रडा ही विचित्र बनाया है। इसका प्रत्येक अंग अद्वितीय है। मानव शरीर में दो गुर्दे होते है, जो शरीर में मल उत्सर्जन का कार्य करते है। वे सारे रक्त में पेशाब को अलग करते हैं। पोर्टल सिस्टम द्वारा गुर्दें में से होकर छनकर दिल की तरफ आता है। यदि गुर्दा खराब हो जाए तो शल्य चिकित्सा द्वारा प्रतिरोपित किया जा सकता है। यदि एक किडनी खराब हो जाए तो उसे निकाल दिया जाता है। तब दूसरी किडनी अकेली ही सारे रक्त को छानती है। अत: उसका रीजनेशन हो जाता है और उसका आकार बत्रडा हो जाता है। इसे कम्पनसेटरी हाइपरट्राफी कहते हैं।   विस्तृत...