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बदलते मौसम की आफत 'एलर्जी'
 

एक सुबह जब वंदना अचानक उठी, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था। कुछ ही मिनटों बाद उसके चेहरे और गर्दन पर लाल चकत्ते या रैशिज पत्रड गये। क्या यह ऐसी महामारी थी जिसकी बाइबिल में भविष्यवाणी की गयी है? यह सोचते हुए वह फौरन डॉक्टर के पास पहुंची। खतरे की घंटी उसके चारों तरफ बज रही थी। यह सब नाटक क्यों हो रहा था? डॉक्टर ने उसे बताया कि यह एलर्जिक रिएक्शन है जो बदलते मौसम की वजह से हुआ है। उपचार के लिए डॉक्टर ने वंदना को कुछ गोलियां दे दी।
एलर्जिक रिएक्शन। सुनने में यह एक साधारण सी बात लगती है, लेकिन यह जान के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए होशियार रहें। बहरहाल, अब तो मौसम बदलने का सिर्फ कारण ॠतुचक्र भी नहीं है ग्लोबल वार्मिंग के चलते भी मौसम में अनियंत्रित बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में क्या एलर्जियां ज्यादा दूर रहेंगी?

सीधी सी बात यह है कि जब किसी बाहरी तत्व के प्रति जिस्म असामान्य प्रतिक्रिया करता है, तो उसे एलर्जी कहते है। आपको फूड, स्पर्श, जो कुछ आप सूंघते हैं, ड्रग्स और विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों से एलर्जी हो सकती है। फिलहाल जो मौसम चल रहा है उसमें स्पर्श और श्वास एलर्जियां अपना सिर उठाने लगती है। एलर्जी के सामान्य लक्षण हैं- बार-बार छींकना, त्वचा पर चकत्ते, आंखों में खुजली, खांसी और कोल्ड, ब्रोनकाइल अस्थमा और कंजक्टिवाइटिस। जाहिर सी बात है कि इनसे बचने के लिए या तो आप घर में बंद रहे या ध्यान दें।

जिन चीजो से एलर्जी होती है उन्हें एलर्जन्स कहते हैं। एलर्जी से बचने का तरीका यह है कि उसे होने से रोका जाए और अगर हो जाए, तो फौरन सही करने के लिए एक्शन लिया जाए। अगर आपको एलर्जी का खतरा बना रहता है, तो आगे पत्रढते रहें। स्किन रैशिज या त्वचा पर दिदौरा के लिए, चंदन की लकत्रडी को गीले पत्थर पर रगत्रड लें और रैशिज पर उसका लेप लगायें, दिन में कम से कम तीन बार। बर्फ के पानी से इसे धो लें और सुखा लें। अगर सांस लेने में दिक्कत आ रही है तो एक कमरे में खुशबूदार लैम्प जलाएं और उसमें कपूर जलाएं जिससे आपकी बंद नाक खुल जायेगी या पूरी श्वास नली को साफ करने के लिए दो बूंद यूक्लिप्टस तेल लैम्प में डाल दें।

अगर आंखों में खुजली हो रही है, तो गुलाब जल को आइस ट्रे में जमा लें, इन क्यूब्स को आंखों पर रखकर आहिस्ता-आहिस्ता मलें। यह काम हर शाम करें ताकि दिन भर की धूल से छुटकारा पाया जा सके। हमेशा की तरह योग, प्राणायाम आपके शरीर को डिटोक्स और रिलैक्स करने में मदद करता है। जलनेती या एक नथूने से पानी अंदर लेना और दूसरे से बाहर निकालने की क्रिया से भी बहुत मदद मिलती है। रिलैक्स करें और सही से सांस लें।

-डॉ.माजिद अलीम