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आधुनिकता की देन है 'किडनी फेल्योर'?
ईश्वर ने मानव शरीर बत्रडा ही विचित्र बनाया है। इसका
प्रत्येक अंग अद्वितीय है। मानव शरीर में दो गुर्दे होते है, जो शरीर में
मल उत्सर्जन का कार्य करते है। वे सारे रक्त में पेशाब को अलग करते हैं।
पोर्टल सिस्टम द्वारा गुर्दें में से होकर छनकर दिल की तरफ आता है। यदि
गुर्दा खराब हो जाए तो शल्य चिकित्सा द्वारा प्रतिरोपित किया जा सकता है।
यदि एक किडनी खराब हो जाए तो उसे निकाल दिया जाता है। तब दूसरी किडनी
अकेली ही सारे रक्त को छानती है। अत: उसका रीजनेशन हो जाता है और उसका
आकार बत्रडा हो जाता है। इसे कम्पनसेटरी हाइपरट्राफी कहते हैं। भारत में
किडनी ट्रांसप्लांट का पहला आप्रेशन 1 दिसम्बर 1971 को तमिलनाडु के
बिल्लौर शहर में क्रिश्चियन मेडिकल कालेज में 35 वर्षीय शान मुंगम नामक
व्यक्ति का किया गया था।
यदि गुर्दे में पथरी हो तो बहुत दर्द होता है। यह बीमारी स्रियों की
अपेक्षा पुरूषों को ज्यादा होती है। यदि दोनो गुर्दे खराब होजाएं तो
डायलिसिस क्रिया द्वारा सप्ताह में एक बार सारे शरीर का रक्त
हीमोडायलिसिस द्वारा शोधित किया जाता है। यदि न किया जाए तो शरीर फूल जाता
है। मल टिश्यू फ्लूड के रूप में टिश्यू या मसल्स मे इकट्ठा हो ता रहता
है। फलत: शरीर में सूजन आ जाती है। यूरिया, अमोनिया, यूरिक एसिड,
हिमयूरिक एसिड क्लोराइड्ज, फास्फेट सल्फेट शरीर में इकट्ठे होते रहते
हैं। यह शरीर से बाहर निकाल देने चाहिएं। किडनी के अतिरिक्त हमारे शरीर
का मल आंतों, जिगर, चमत्रडी, फेफत्रडे इत्यादि भी बाहर निकालते रहते हैं।
पेट में से रैनिन के ज्यादा निकास के कारण जिगर में एन्जियोटेन्सिन पैदा
होता है, जिसके फलस्वरूप रक्त का दबाव बत्रढ जाता है। 50वर्ष के बाद
पुरूषों में प्रोस्टेट ग्लैंड की वृध्दि के कारण यूरेनरी ब्लैडर पर दबाव
पत्रडता है। इस कारण दर्द के साथ बार-बार पेशाब आता है। एंटीबायोटिक एवं
सल्फा दवाइयों द्वारा इनका इलाज होता है। यदि पेशाब में रक्त आए तो गुर्दो
में पथरी होने के कारण वे यूरेनरी ब्लैडर में आकर दर्द करते हैं। सर्जरी
द्वारा इनका इलाज संभव है। कई बार बच्चों और बत्रडों मे स्वत: ही
अनियंत्रित पेशाब स्खलन हो जाता है। इसका कारण नर्व डैमेज, ब्लैडर का
इंफैक्शन है। कई बार उत्तकों के बीच में टिश्यू फ्लूड इकट्ठा हो जाता है
और शरीर फूल जाता है या सूजन आ जाती है। यदि रक्त में यूरिय, यूरिक अम्ल
इकट्ठे हो जाएं तो यूरीमिया कहलाता है।
हर व्यक्ति के दो गुर्दे रीत्रढ की हड्डी के साथ लगे होते है।
13सेंटीमीटर और 4सेंटीमीटर आकार वाले दो गुर्दों में से बायीं तरफ की
किडनी चौत्रडी ऊपर होती है। गुर्दे या वृक्क पर दो झिल्लियां चत्रढी होती
है। यह एडीपोज कैप्सूल द्वारा शरीर में लगे होते है। नैफरोन हर गुर्दे
में पिरामिड आकार के होते है। एक किडनी में 10लाख नैफरोन होते है। वे
गुर्दे की रक्तशोधन की इकाई है। गुर्दा यूरेटर में से होता यूरेनरी
ब्लैडर में खुलता है। पुरूषों में नर जननांग द्वारा ही पेशाब और
शुक्राणुओं का विसर्जन होता है। स्रियों में पेशाब नली और अण्ड नली
अलग-अलग मार्ग द्वारों से बाहर की तरफ खुलती है। भारत में प्रतिवर्ष लाखों
लोग गुर्दे फेल होने के कारण मर जाते है। जागरूकता एवं सतर्कता ही इसका
सर्वोत्तम एवं कारगार इलाज है। यदि हम वाकई अपने स्वास्थ्य के प्रति
सतर्क एवं सजग है तो दीर्घजीवी हो सकतेहै। प्रदूर्षित जल पथरी ही नहीं
बल्कि कई अन्य बीमारियों का भी कारण बनता है। अत: किडनी फेल्योर से बचने
के लिए स्वच्छ जल का सेवन सबसे जरूरी है।
-विजेन्द्र कोहली गुरदासपुरी |