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बिजली की दरों में इजाफे का कमरतोत्रड झटका

कमरतोत्रड महंगाई से निजात मिलने की आस पूरी होना दूर बल्कि मध्यप्रदेश सरकार ने विद्युत नियामक आयोग के कंधों का सहार ालेकर बिजली की नई दरें घोषित कर महंगाई में इजाफा कर जो जोरदार झटका दिया है उसके भार से आम जनता का त्राहिमाम कर उठना स्वाभाविक है। नई दरें छह अगस्त से प्रभावशील हो जाएंगी। जहां तक विद्युत वितरण कंपनियों के लगातार घाटे में चलने का ताल्लुक है तो इसके लिए कंपनियों के अधिकारियों ओर कर्मचारियों की अलमस्त लापरवाही और दीगर बहुत सारे कारणों का निहित होना है किन्तु घाटे की पूर्ति करने के लिए विद्युत दरें बत्रढाकर आम जनता पर सीधे-सीधे बोझ डालकर चैन की बंसी बजाने की प्रवृत्ति को ठीक नही ठहराया जा सकता। बिजली कंपनियों को घाटे से उबारना ही है तो बिजली चोरी को कठोरता के साथ नियंत्रित करने की प्रभावी पहल की जानी चाहिए किन्तु बिजली चोरों को पकत्रडने की कुव्वत तो सरकार के पास नहीं है। राज्य नियामक आयोग ने आम उपभोक्ताओं को बिजली की दरों में औसतन 3.61 फीसदी का जोरदार झटका देकर जो उपकार किया है उसका खामियाजा प्रदेश की सरकार को देर सवेर भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। विद्युत दरें बत्रढाने का सीधा-सीधा असर घरेलू उपभोक्ता और किसानों पर पत्रडा है जिनके कोप का भाजन होने से प्रदेश सरकार बच नहीं सकती है। विद्युत नियामक आयोग की नई दरों के मुताबिक घरेलू उपभौक्ताओ के लिए विद्युत दरों में अधिकतम 15 फीसदी तक की और किसानों के लिए अधिकतम 12 फीसदी तक की बत्रढोतरी की गई है। जबकि उद्योगों के लिए अधिकतम सात फीसदी की वृध्दि की गई है। राज्य में बिजली वितरण की व्यवस्था संभालने वाली पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और मध्य क्षेत्र की विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली की दरों में औसतन 28.82 फीसदी वृध्दि ने का प्रस्ताव रखा था जिसके विपरीत 3.61 फीसदी की वृध्दि आयोग द्वारा की गई है। इस तरह से आयोग ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि उसने अपने नई उपभोक्ताओं पर कम से कम बोझ डालने का ही प्रयास किया है। विद्युत दरों में की गई इस वृध्दि के फलस्वरूप चालू वित्त वर्ष 2008-09 में 8930 करोत्रड रूपए के राजस्व की तुलना में वित्त वर्ष 2009-10 में 9252 करोत्रड रूपये के राजस्व प्राप्त की उम्मीद जताई गई है। इस प्रकार से 322 करोत्रड रूपये का राजस्व बत्रढने का अनुमान लगाया गया है।