लंदन: छरहरी काया पाने का लालसा और लंबी एक्सरसाइज से बचने की हर संभव कोशिश इस सब के लिए लोगों में बढ रही लालसा और इसके लिए दिन प्रतिदिन आ रही नयी-नयी तकनीकों के बीच अब एक नया नाम हाई इंटेनसिंटी ट्रेनिग (एचआईटी) के क्रेज का जमाना आया है। इसके जरिए कम समय में थोडे थोडे अन्तराल के बाद कडी एक्सरसाइज करने से छरहरी काया जल्द ही पायी जा सकती है। कनाडा की मैकमास्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मार्टिन गिबाला का कहना है कि एचआईटी तकनीक में बारी-बारी से कडी और हल्की एक्सरसाइज करायी जाती है।
अध्ययन से पता चला है कि एचआईटी तकनीक का एक्सरसाइज करने की क्षमता कार्बोहाइट्रेड के उपापचय और इंसुलिन की सक्रियता पर काफी अच्छा असर पडता है। यह तकनीक अधिक वजन वाले मधुमेह से ग्रस्त लोंगों के लिए भी लाभदायक साबित हो सकती है। बर्मिघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जैमी तिमोन का कहना है कि छह सप्ताह तक एचआईटी तकनीक की मदद से एक्सरसाइज करने की क्षमता में उतना ही इजाफा होता है जितना 20 सप्ताह तक परम्परागत तरीके के प्रशिक्षण से होता है
एचआईटी की मदद से एक्सरसाइज करने की क्षमता और इंसुलिन की सक्रियता तो बढती ही है साथ ही साथ लम्बे समय तक एक्सरसाइज करने मजबूरी से भी छुटकारा मिलता है। कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि एचआईटी तकनीक से बताये जा रहे लाभ का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। यह तकनीक काफी कष्टकारी भी हो सकती है और हो सकता है कि इसका शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी पडे।