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कारोबारियों
पर चुनाव से ऐन पहले दिल्ली सरकार ने मेहरबानी दिखाई है। दिल्ली के वित्त
मंत्री ए के वालिया ने व्यापार और कर विभाग के अधिकारियों को साफ कहा है
कि कारोबारियों को किसी तरह से परेशान नहीं किया जाए। त्योहारी सीजन के
दौरान विभाग के इंस्पेक्टर किसी दुकान पर नहीं जाएंगे और कमिश्नर की
अनुमति के बिना कोई छापा नहीं मारा जाएगा। मंत्री ने कहा कि शहर के
कारोबारियों की तरफ से किए जा रहे सहयोग को देखते हुए यह कदम उठाया गया
है।
वालिया ने कारोबारियों से अपील की कि वे हर तरह की बिक्री और पैसे के
लेन-देन की रसीद जारी करें। ऐसा करने से विभाग और कारोबारियों के बीच आपसी
विश्वास बना रहेगा। वालिया ने कहा कि दिल्ली के कर राजस्व में उल्लेखनीय
वृद्धि हुई है। शहर के विकास और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक
ढालने के लिए इतना कर संग्रह पर्याप्त है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कारोबारी अपने कारोबार को आगे बढ़ाएंगे। इस तरह
सरकार को मिलने वाले कर राजस्व में भी वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि
विभाग को 2005-06 में 6,500 करोड़ रुपए और 2006-07 में 7,366 करोड़ रुपए
कर राजस्व प्राप्त हुआ। वित्त मंत्री ने इस बजट में वर्ष 2007-08 में
दिल्ली संपूर्ण कर राजस्व 11,952 करोड़ रुपए रहने की बात कही थी।
अकेले सितंबर के महीने में ही 4,000 करोड़ रुपए का घाटा उठा चुके दिल्ली
के कारोबारी त्योहारी सीजन में दिल्ली सरकार से इसी तरह के कदम की उम्मीद
कर रहे थे। मंदी और आतंक के साए में बाजारों में इस बार वैसी रौनक नहीं
दिख रही है, जिसके लिए दिल्ली जानी जाती है। व्यापार और कर विभाग की तरफ
से छापे नहीं मारने के फैसले से दिल्ली के 7 लाख से अधिक कारोबारियों को
सीधा फायदा होगा।
वालिया का यह फैसला त्योहारी सीजन के साथ ही चुनावी सीजन में भी आया है।
दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस व्यापारी वर्ग को
खुश रखना चाहती है। दिल्ली में एक चौथाई वोट बैंक इसी तबके का है। |