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..पर वैश्विक संपत्ति बाजार में भारत फिसड्डी
 

अमीरों में आगे,अमीरी में बहुत पीछे। देश की यही हकीकत है। अंबानी बंधु और एलएन मित्तल जैसे 53 अरबपतियों की अमीरी का डंका भले ही दुनिया भर में बज रहा हो, लेकिन कुल संपत्ति के लिहाज से भारत कहीं नहीं ठहरता है।

अंतरराष्ट्रीय सलाहकार फर्म बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप [बीसीजी) की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2007 में एक लाख 9 हजार 500 अरब डालर के ग्लोबल संपत्ति बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज एक फीसदी है। यह बाजार 4.9 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। तेजी से बढ़ते संपत्ति बाजार के बावजूद इसमें देश की केवल 1400 अरब डालर की हिस्सेदारी है। देश का संपत्ति बाजार अल्प विकसित और अपेक्षाकृत छोटा है।

अमेरिकी बिजनेस पत्रिका फो‌र्ब्स की दुनिया के सबसे दौलतमंदों की सूची देखें, तो इसमें इस साल भारतीय अरबपतियों की तादाद 36 से बढ़कर 53 हो गई है। इनका कुल नेटवर्थ 340 अरब डालर से ज्यादा है। विश्व के शीर्ष दस सबसे अमीरों में भी मित्तल, मुकेश-अनिल अंबानी और केपी सिंह शामिल हैं।

बीसीजी ने संपत्ति बाजार के आकार की गणना मैनेजमेंट के अधीन संपत्तियों के आधार पर की है। इसमें नकद जमाराशि, मुद्रा बाजार फंड, सूचीबद्ध प्रतिभूतियां और घरेलू व विदेशी संपत्तियां शामिल हैं। निवेशकों के स्वयं के व्यवसाय, मकान और लग्जरी वस्तुओं से अर्जित धन को इससे अलग रखा गया है।