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क्रिकेटर
नवाब मंसूर अली खान पटौदी व सुविख्यात नायिका शर्मिला टैगोर की सुपुत्री
सोहा अली खान मानती हैं कि उनकी पिछली फिल्में बहुत अच्छी नहीं रहीं, पर
वे लगातार प्रयास कर रही हैं। याद रहे कि फिल्मों में आने से पहले सोहा
ने प्रसिद्ध संस्था फोर्ड फाउंडेशन व सिटी बैंक के साथ काम किया है। बाद
में उन्हें लगा कि अभिनय ही उनके लिए ज्यादा मुनासिब रहेगा, सो वे फिल्मी
दुनिया में आ गईं।सोहा कहती हैं कि इस निर्णय या इससे पहले लिए गए फैसलों
में घर वालों का बहुत हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने निर्णय सबकी सहमति से
लिए पर इस बाबद कोई बंधन नहीं था। वे यह भी कहती हैं कि माता-पिता दोनों
उनका मार्गदर्शन जरूर करते हैं पर अपनी तरफ से कुछ थोपते बिलकुल नहीं
हैं। यहाँ तक कि पढ़ते समय भी माता-पिता ने कभी उन पर यह दबाव नहीं बनाया
कि उन्हें फर्स्ट क्लास ही पास होना है।सैफ भी उन्हें सलाह जरूर देते हैं
लेकिन उस सलाह को मानने न मानने का अधिकार सोहा के पास सुरक्षित रहता है।
वे कहती हैं अभिभावकों ने हमें कुछ मूल्य दिए हैं और स्वतंत्रता भी। हमें
अपनी तरह सोचने की आजादी है। हम एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं
और आखिर में अपनी राह चलते हैं।अन्य भाई-बहनों की तरह ही सैफ के साथ उनका
कभी-कभी झगड़ा भी हो जाता है। पर यह झगड़ा ज्यादा नहीं चलता। सैफ अली खान,
सोहा से बड़े हैं और एक तमीजदार बहन की तरह सोहा उनका लिहाज करती हैं। वे
कहती हैं थोड़े-बहुत मतांतर तो चलते रहते हैं। कई बार मैं खामोश हो जाती
हूँ, कई बार सैफ चुप हो जाते हैं।पिछले दो-तीन सालों में "रंग दे बसंती"
के बाद सोहा की "खोया खोया चाँद", "मुंबई मेरी जान", "दिल कबड्डी" "ढूँढते
रह जाओगे आदि फिल्में आ चुकी हैं। इनमें से कुछ को चर्चा जरूर मिली मगर
कोई बड़ी सफलता उनके हाथ नहीं आई। सीरियल किसर के नाम से प्रसिद्ध इमरान
हाशमी के साथ "तुम मिले" अगले माह आने की संभावना है।इमरान हाशमी की
फिल्म में किस न हो, यह आज तो लगभग असंभव माना जाता है। सो इस फिल्म में
इमरान-सोहा के दो चुंबन दृश्य चर्चा का विषय बन चुके हैं। पहले सीन के
बारे में खबरें आई थीं कि सोहा ने वह सीन करने से साफ मना कर दिया था।
बाद में उन्हें इसके लिए मनाया गया। कुछ दिन बाद वैसा ही दूसरा सीन आ गया।
तब फिर सोहा ने कुछ ना-नुकुर की मगर बात बनी नहीं। अब फिल्म आने वाली है।
देखते हैं किसिंग सीन भी कुछ रंग दिखाते हैं कि नहीं? |