|
फिल्म
जगत् की नामचीन निर्माता कंपनी परसेप्ट पिक्चर कंपनी (पीपीसी) ने फ्लैग
फाउंडेशन ऑफ इंडिया नामक एक एनजीओ के सहयोग से बॉलीवुड की उम्दा अभिनेत्री
नंदिता दास द्वारा पहली निर्देशित फिल्म 'फिराक' की स्पेशल स्की्रनिंग गत
रात दिल्ली के पीवीआर प्लाज़ा में रखी, जहां नंदिता दास, अभिनेत्री शहाना
गोस्वामी व टिस्का चोपड़ा के साथ काफी बड़ी हस्तियों जैसे राहुल गांधी,
सांसद, स्पोट्समैन, उद्योगपति व फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के फाउंडर श्री
नवीन जिंदल, श्रीमती शालू जिंदल, श्री अग्निवेश, मशहूर आर्टिस्ट सुधीर
तैलंग, शिवानी वज़ीर पैशरीच, फिल्म मेकर बॉबी बेदी, आर्ट सास्त्र गैलरी के
डायरेक्टर श्री विपुल सैनी, पेंटर जतिन दास व अन्य ख्याति प्राप्त लोगों
ने शामिल होकर पूरे माहौल में चार चांद लगा दिए।
फिल्म 'फिराक' भारतीय सिनेमाघरोें में 20 मार्च, 2009 को प्रदर्शित होगी।
इस फिल्म में निपुण प्रतिभाओं की एक पूरी श्रेणी है जिनमें नसीरूद्वीन
शाह, परेश रावल, दीप्ती नवल, रघुबीर यादव, संजय सूरी, टिस्का चोपड़ा व नए
कलाकार जैसे सहाना गोस्वामी, नोवाज़ आदि अहम भूमिकाएं निभा रहें हैं।
फिल्म 'फिराक' सांप्रदायिक दंगों के बाद प्रभावित होने वाले मानवीय पहलुओं
व उसके संबंधों को बयां करती है।
गौरतलब है कि इस स्पेशल स्की्रनिंग के अवसर पर सभी लोगों ने नंदिता दास
की काफी तारीफ की। राहुल गांधी ने कहा कि 'फिराक ऐसी कोशिश है जिसमें यह
दर्शाया गया है कि कैसे किसी भी दंगें के बाद हर एक दिन इंसान के लिए भारी
पड़ता है। उसे क्या कुछ नहीं सहना पड़ता है। चूंकि अभी चुनाव होने वाले है,
ऐसे में मैं यही कहूंगा कि हमें सही मायने में फिराक जैसी कुछ और फिल्मों
की ज़रुरत है।'
'फिराक' उर्दू का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है किसी मौके की तलाश। यह
फिल्म दंगों के बाद प्रभावित जन-जीवन की कहानी है, जिसमें दर्शाया गया है
कि दंगे किस तरह आम आदमी के लिए दिलो-दिमाग को ही नहीं, बल्कि रिश्तों को
भी प्रभावित करते हैं। इस फिल्म में पांच कहानियों का समागम है जो दंगों
के समय पर आहत भावनाओं, रिश्तों, प्रतिक्रियाओं एवं बेसहारापन को दर्शाती
है। यद्यपि पांचों कहानियां अलग-अलग रिश्तों पर आधारित हैं, इसके बावजूद
सभी कहानियां कहीं न कहीं हिंसा एवं दंगों के खिलाफ आवाज बुलंद करती हैं।
वहीं सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि 'फिराक दंगों के बाद प्रभावित जन-जीवन
की कहानी को चित्रित करती है। दंगें जो हमेशा ही मनुष्य को सिवाय दर्द के
और कुछ नहीं देते। मैं नंदिता को इतनी उम्दा फिल्म बनाने के लिए वाकई
शुभकामनाएं देता हूं।'
निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने वाली नंदिता दास अपनी इस फिल्म को लेकर
बेहद उत्साहित है। वह कहती हैं कि 'यह फिल्म दंगों के एक महीने बाद की
स्थिति से रुबरु कराती है। इसलिए इसमें हिंसा बिल्कुल भी नहीं है। इस
फिल्म की कहानी दंगे या उसके आसपास की नहीं बल्कि उसके बाद की स्थितियों,
आम आदमी की मुश्किलों, बेपर्दा होते रिश्तों एवं टूटती मानवीयता को
केन्द्रित करती है। इसमें मैंने हिंसा के बाद व्यक्ति के दिलो दिमाग पर
पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने की कोशिश की है।' इतना ही नही, नंदिता का
मानना है कि 'फिराक हर उस व्यक्ति को देखनी चाहिए जो विश्व हित के लिए
सोचते हैं, क्योंकि हिंसा आज हर वर्ग की चिंता का विषय है और कहीं न कहीं
शांति एक सामूहिक इच्छा बन गई है।'
परसेप्ट पिक्चर कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक श्री शैलेन्द्र सिंह कहते
हैं कि 'इस फिल्म में हर एक किरदार किसी न किसी मकसद से प्रेरित है, जो
लोगों को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने पर जरुर मजबूर करेगा। मुझे पूरा
विश्वास है कि यह फिल्म बुलंदियों को छूने में पीछे नहीं रहेगीं। बस, अब
हमें इंतजार है तो सिर्फ भारत में 'फिराक' के प्रदर्शन का।'
े
इस फिल्म की कहानी व पटकथा लेखन नंदिता दास व शुचि कोठारी ने की है। वहीं,
रजत ढोलकिया व पीयुष कनोजिया ने गीतों को संगीत की लय पर सजाया है। साथ
ही रवि चंद्रन ने फोटोग्राफी का निर्देशन कर अपनी काबिलियत का अनोखा
परिचय दिया है।
फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया की स्थापना जनवरी 2002 में 1980 के सोसायटिज़
रजिस्टेशन एक्ट के अंतर्गत की गई थी। सांसद, स्पोट्समैन व उद्योगपति श्री
नवीन जिंदल जिन्होंने तकरीबन सात वर्षों के कोर्ट की लंबी जंग के बाद सभी
भारतीयों के लिए यह रास्ता निकाला कि वे हमारे राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान
के साथ अपने घरों, कार्यलयों तथा फैक्ट्रियों में साल के हर दिन दिखा सकें।
फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया की काफ़ी सारी परियोजनाओं ने हमाारे देश के लोगों
को राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्र की उन्न्ति के लिए भी प्रोत्साहित किया।
परसेप्ट पिक्चर कंपनी की स्थापना 2002 में हुई थी। यह भारत की तेजी से
अग्रसर होने वाली एकीकृत विषय-वस्तु के निर्माण, संग्रह व वितरण की कंपनी
है। यह कंपनी मोशन पिक्चर्स, टेलीविजन साफ्टवेयर, फिल्म वितरण व विपणन,
विज्ञापन फिल्मों के निर्माण, कॉरपोरेट फिल्मों, लाइव इवेन्ट आदि में
दक्ष है। पीपीसी प्रोडक्शन, वितरण, प्रसारण के द्वारा उच्च कोटि की फिल्मों
का निर्माण करती है। विपणन, अच्छी विषय-वस्तु एवं वितरण के नवीनीकरण के
कारण ही पीपीसी ने अपने क्लाइंटों से बेहतर संबंध कायम रखा है। पीपीसी
परसेप्ट लिमिटेड का एक भाग है जो इंटरटेनमेंट, मीडिया व संचार जैसे
क्षेत्रों का कार्य संभालता है। वित्त वर्ष 2008 में 2,000 करोड़ रुपए के
कैपिटलाइज्ड बिलिंग के कारण परसेप्ट आज बुलंदियों को छू रहा है। आलम यह
है कि आज मध्य पूर्व क्षेत्र व भारत में परसेप्ट के 62 कार्यालय है, जिनमें
1200 लोग कार्यरत है। |