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उत्तर प्रदेश में सत्ता संघर्ष का शंखनाद

जनसंख्या तथा लोकसभा सीटों व मतदाताओं की संख्या के ऐतबार से देश के सबसे बत्रडे राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों पूरे उबाल पर है। पिछले लोकसभा चुनावों से पूर्व राज्य में चौथे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस पार्टी ने चुनावों में जब से अपनी दयनीय स्थिति में सुधार करते हुए राज्य में दूसरे नंबर का दल होने की हैसियत बनाई है, तब से प्रदेश की सत्तारूत्रढ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख तथा राज्य की मुख्यमंत्री मायावती को समाजवादी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी के बजाएकांग्रेस पार्टी ही उनके अपने लिए सबसे बत्रडा ख़तरा नज़र आने लगी है।..   विस्तृत...


राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों के अंतर को दर्शाता जनादेश

देश के अठ्ठारहवें प्रधानमंत्री के रूप में डॉ मनमोहन सिंह के शपथ लेने के बाद कांग्रेस के इस दावे की पूर्णतय: पुष्टि हो गई है कि वाक़ई 'सिंह इज़ किंग'। परन्तु इन ताज़ातरीन चुनावों के प्रचार अभियान के दौरान विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा इसी कांग्रेस पार्टी के संबंध में कांग्रेस के विरोधी दलों द्वारा कुछ ऐसी बातें की गईं जिन्हें जनता '  आसानी से भुला नहीं सकती। कांग्रेस पार्टी तथा ख़ासतौर पर नेहरु गांधी परिवार के सदस्यों पर निशाना साधते हुए उन्हें अपमानित करने तथा कांग्रेस पार्टी के प्रति कत्रडवे शब्दों काप्रयोग...   विस्तृत...


कार्यकर्ताओं में समर्पण-तालमेल कहां से लाएं नेताजी

बरसों तक नेताजी ने सत्ता सुख भोगा। लाव-लश्कर लिए फिरे। लोगों के बुलावे पर गए भी तो बनठन के। ..अजी अभी टाइम नहीं है। बड़े व्यस्त हैं। किसी का काम पड़ा तो जवाब मिला- साहब अभी बाहर हैं, कल बात करना। परेशान लोग सिफारिश में छुटभैये नेताओं या कर्मठ कार्यकर्ताओं को लेकर पहुंचे तो भी काम नहीं हुआ। इससे बड़ी किरकिरी भी झेली। अब जब किस्मत का फैसला जनता की अदालत में फिर होने को है, कार्यकर्ता भी मुंह सिये खड़े हैं। नेताजी इशारे कर-करके अपनी जय-जयकार को कहे जा रहे हैं, ...  विस्तृत...